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कोटद्वार में ‘शक्ति संगम’ का सफल आयोजन, महिलाओं के हुनर और उद्यमिता को मिला मंच

by sachkitaqat
कोटद्वार: महिलाओं की प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रविवार को कोटद्वार स्थित बावर्ची ग्राउंड्स में आयोजित ‘शक्ति संगम’ मिनी मेला उत्साह के साथ संपन्न हुआ। ‘Empowering Women, Growing Together’ यानी महिलाओं को सशक्त बनाने और साथ मिलकर आगे बढ़ने की थीम पर आयोजित इस एक दिवसीय मेले में महिला उद्यमियों ने अपने हुनर, उत्पादों और व्यवसाय का प्रदर्शन किया। सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक चले इस मेले में प्रवेश निशुल्क रखा गया था।
 
 
मेले में हैंडमेड ज्वेलरी, रेजिन आर्ट, क्रोशिया उत्पाद, सेंटेड कैंडल्स, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, मेकअप, सैलून सेवाओं, गार्डनिंग सहित विभिन्न रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े स्टॉल लगाए गए। खास बात यह रही कि इन स्टॉलों के माध्यम से महिलाओं को अपने उत्पादों की पहचान बनाने, नए ग्राहकों तक पहुंचने और अपने कारोबार को आगे बढ़ाने का अवसर मिला।
 
इस आयोजन की खासियत यह रही कि यहां केवल उत्पादों की बिक्री ही नहीं हुई, बल्कि महिलाओं ने अपने उद्यम शुरू करने के अनुभव, चुनौतियों और सफलता की कहानियां भी साझा कीं। मेले में बातचीत के दौरान तीन महिला उद्यमियों ने बताया कि किस तरह छोटे स्तर से शुरू किया गया काम धीरे-धीरे उनकी पहचान बन रहा है।
 
लंदन से सीखी शेफिंग, कोटद्वार में जापानी-गढ़वाली स्वाद का संगम
 
 
मेले में मौजूद शेफ अनिवर्ती भट्ट ने बताया कि महिलाओं को एक मंच पर लाने का विचार किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से उन महिलाओं को अपने उत्पाद और ब्रांड लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है, जिनका कारोबार अभी तक घर या आसपास के क्षेत्र तक ही सीमित था।
 
अनिवर्ती स्वयं भी उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रख चुकी हैं। उन्होंने लंदन में छह साल बिताए और वहां से शेफिंग की पढ़ाई की। अब वह कोटद्वार में जापानी थीम पर आधारित अपना कैफे ‘अमामी’ शुरू कर रही हैं। उनकी कोशिश जापानी खानपान को गढ़वाली संस्कृति के साथ जोड़ने की है। इसके तहत मेन्यू में बुरांश की आइसक्रीम, बुरांश का शरबत और जापानी डिश रामेन को शामिल किया गया है।
 
नए उद्यमियों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “बस शुरुआत कर दो, चीजें धीरे-धीरे अपने आप बनती जाती हैं।”
 
500 रुपये से शुरू किया रेजिन आर्ट का सफर
 
मेले में ‘Resin by Nikita Rawat’ के नाम से अपना स्टॉल लगाने वाली निकिता रावत ने बताया कि उन्होंने कॉलेज के प्रथम वर्ष में ही अपने इस काम की शुरुआत कर दी थी। जयपुर में पढ़ाई के दौरान दूसरे लोगों को अपने व्यवसाय और कला को आगे बढ़ाते देखकर उन्हें भी अपना हुनर व्यवसाय में बदलने की प्रेरणा मिली।
 
 
निकिता ने महज 500 रुपये की पॉकेट मनी से रेजिन आर्ट का काम शुरू किया। उन्होंने इसके लिए किसी संस्थान से प्रशिक्षण नहीं लिया, बल्कि ऑनलाइन माध्यमों और यूट्यूब वीडियो की मदद से खुद ही यह कला सीखी। वह घर से ही अपने उत्पाद तैयार करती हैं और अब सेंटेड कैंडल्स सहित विभिन्न रचनात्मक उत्पाद भी बनाती हैं।
 
निकिता के अनुसार, कोटद्वार में रेजिन आर्ट का काम अभी सीमित स्तर पर है, इसलिए लोगों के लिए उनके उत्पाद कुछ अलग और नया अनुभव लेकर आते हैं। उनके इस सफर में परिवार भी पूरा सहयोग करता है। उनके माता-पिता और बहन भी काम में हाथ बंटाते हैं। उन्होंने युवाओं और महिलाओं को संदेश दिया कि किसी भी काम को शुरू करने के लिए बड़े निवेश से ज्यादा जरूरी लगन और शुरुआत करने का साहस है।
 
बच्चों के प्रोत्साहन से क्रोशिया के हुनर को मिली नई पहचान
 
मेले में स्वाति शाह ने अपने क्रोशिया से तैयार किए गए आकर्षक उत्पादों का स्टॉल लगाया। वह पर्स, मफलर, रबर बैंड, हेयर क्लिप और ईयररिंग्स सहित कई तरह की वस्तुएं तैयार करती हैं। उनकी खासियत यह है कि ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार उत्पादों को कस्टमाइज भी करवा सकते हैं।
 
 
स्वाति ने बताया कि पहले वह घर पर ही थोड़ा-बहुत क्रोशिया का काम करती थीं, लेकिन उनके बच्चों ने उन्हें अपने हुनर को दूसरे लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने यूट्यूब और व्हाट्सऐप स्टेटस के माध्यम से अपने काम का प्रचार शुरू किया।
 
उन्होंने बताया कि काम शुरू किए अभी केवल तीन महीने हुए हैं, लेकिन उन्हें आसपास के लोगों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी अच्छे ऑर्डर मिल रहे हैं। शुरुआती परेशानियों के बावजूद वह धीरे-धीरे अपने काम को आगे बढ़ा रही हैं। उनके अनुसार, इस तरह के आयोजन घरेलू स्तर पर काम कर रही महिलाओं को आगे बढ़ने का हौसला देते हैं।
 
महिला उद्यमियों को मिला पहचान और नेटवर्किंग का अवसर
 
‘शक्ति संगम’ मिनी मेला केवल खरीदारी का केंद्र नहीं रहा, बल्कि स्थानीय महिला उद्यमियों के लिए आपसी संपर्क, अनुभव साझा करने और अपने व्यवसाय को नई पहचान देने का अवसर भी बना। घरेलू स्तर पर काम शुरू करने वाली महिलाओं से लेकर नए स्टार्टअप की दिशा में कदम बढ़ा रही उद्यमियों तक, सभी को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिला।
 
इस तरह के आयोजन स्थानीय स्तर पर महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। ‘शक्ति संगम’ के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि सही अवसर और प्रोत्साहन मिले तो घर की चारदीवारी से शुरू हुआ हुनर भी एक सफल व्यवसाय और पहचान का रूप ले सकता है।