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राज्यसभा में सांसद डॉ. नरेश बंसल ने उठाया पंचायतों के राजस्व सशक्तिकरण का मुद्दा, केंद्र ने बताई डिजिटल पहल और प्रोत्साहन योजनाएं

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देहरादून।  भाजपा के राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल, ने संसद में पंचायतों की स्वयं के स्रोतों से राजस्व संग्रहण क्षमता (ओएसआर) से जुड़े गंभीर जनहित के विषय को उठाते हुए सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने सदन में प्रश्न के माध्यम से पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता, डिजिटल कर संग्रहण व्यवस्था तथा राजस्व बढ़ाने के लिए संभावित प्रोत्साहनों पर सरकार की नीति के बारे में पूछा।

राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में पंचायती राज मंत्री Rajiv Ranjan Singh ने बताया कि पंचायतों के स्वयं के राजस्व स्रोतों की स्थिति का आकलन करने के लिए वर्ष 2022 में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। समिति की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017–18 से 2021–22 के बीच देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पंचायती राज संस्थाओं द्वारा लगभग 25,595 करोड़ रुपये का ओएसआर संग्रह किया गया। इस अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति औसत ओएसआर लगभग 59 रुपये प्रतिवर्ष दर्ज किया गया, जबकि राज्यों के बीच इसमें काफी भिन्नता देखने को मिली। उदाहरण के तौर पर गोवा में यह आंकड़ा 1635 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष तक पहुंचा।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पंचायतों को राजस्व जुटाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें राज्य स्तर पर स्पष्ट नियमों और दिशानिर्देशों का अभाव या उनका पुराना होना, पंचायतों को कराधान संबंधी शक्तियों का पर्याप्त हस्तांतरण न होना, कर व शुल्क लगाने में पंचायतों की अनिच्छा, नागरिकों का सीमित सहयोग तथा बकायेदारों के खिलाफ कमजोर प्रवर्तन तंत्र प्रमुख हैं। मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए सभी राज्यों के साथ साझा किया है।

मंत्री ने बताया कि पंचायतों के राजस्व संग्रह को डिजिटल बनाने के लिए “समर्थ पंचायत पोर्टल” विकसित किया गया है। यह एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो कर और गैर-कर मांगों की तैयारी, कर रजिस्टरों का रख-रखाव, ऑनलाइन भुगतान गेटवे के माध्यम से बकाया भुगतान तथा राजस्व की ऑनलाइन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। इस पोर्टल का सफल पायलट परीक्षण Himachal Pradesh और Chhattisgarh में किया जा चुका है और अन्य राज्यों से भी इसे अपनाने का अनुरोध किया गया है।

इसके साथ ही मंत्रालय द्वारा पंचायतों को राजस्व बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं। संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत वर्ष 2025 में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर “आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार (एएनपीएसए)” की शुरुआत की गई है। इस पुरस्कार का उद्देश्य पंचायतों को स्वयं के राजस्व स्रोतों में वृद्धि कर वित्तीय आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए प्रेरित करना है। पुरस्कार के अंतर्गत प्रथम स्थान पर 1 करोड़ रुपये, द्वितीय स्थान पर 75 लाख रुपये और तृतीय स्थान पर 50 लाख रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है।

इसके अतिरिक्त Finance Commission of India के 16वें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 43,524 करोड़ रुपये के निष्पादन अनुदान की सिफारिश की है, जिसे पंचायतों द्वारा स्वयं के राजस्व स्रोतों के सृजन और वृद्धि से जोड़ा गया है।